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त्रिशा जब दोबारा उठती है, तब शाम के 6 बज चुके थे।

वह उठकर अपने चारों ओर देखती है, उसे कोई दिखाई नहीं देता। बाथरूम और किचन का दरवाजा भी बाहर से बंद था।

वह दृष् को कॉल करती है। वह मार्केट गया हुआ था कुछ सामान लेने और त्रिशा को बताता है कि उसे लगभाग घंटा भर लगेगा आने में।

वह नित्या के बारे में पूछती है तो वह बताता है कि उसके सोने के थोड़ी देर बाद ही उसकी बहन मानवी उसे लेने आ गई थी। वे दोनों अपने किसी रिश्तेदार के यहां गए हैं शायद और आज वहीं रुकेंगे।

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(It was around 6 pm when Trisha woke up again.
She looked around but didn't see anyone.
The bathroom and kitchen doors were also locked from the outside.

She called Drish, who was at the market buying some stuff and told her it would take him about an hour to return.

She asked about Nitya, and he said Nitya's sister Manavi had come to pick her up shortly after she fell asleep. They had likely gone to a relative's place and would stay there for the night.)

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त्रिशा बिस्तर से बाहर निकलकर अपना मुंह धोती है और फिर ऊपर चली जाती है।

ऊपर उनका गेट खुला ही था। वह अंदर जाती है। उनके रूम में भी कोई नहीं था। बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था और उसमें से ब्रश घिसने की आवाज आ रही थी।

वो आवाज लगती है, सामने से छवि की आवाज आती है बाथरूम में से, वो बाथरूम साफ कर रही थी।

वह त्रिशा को अंदर से ही बैठने के लिए बोलती है और थोड़ी देर बाद अपना काम पूरा कर उसके पास आकर बैठ जाती है और दोनों बात करने लगते हैं।

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(Trisha got out of bed, washed her face, and headed upstairs.

She found their gate already open, she entered.
However, their room was empty.

The bathroom door was open, and she heard the sound of brushing.

Chhavi's voice echoed from within, where she was cleaning the bathroom.
Chhavi invited Trisha to take a seat and joined her shortly, completing her task. They began conversing.)

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छवि कल रात मानवी और त्रिशा के बीच बने रोमांटिक पल से अनजान थी, क्योंकि रात में उस समय बस त्रिशा और मानवी ही रूम में थीं।

"लापरवाह चाहते" (Nonchalant longings)जहाँ कहानियाँ रहती हैं। अभी खोजें